6.59.95स तस्य वाक्यम् परिपूर्ण घोषम् | ज्या शब्दम् उग्रम् च निशम्य राजा | आसाद्य सौमित्रिम् अवस्थितम् तम् | कोप अन्वितम् वाक्यम् उवाच रक्षह्