6.69.88अभिगम्याङ्गदं क्रुद्धो वालिपुत्रम् नरान्तकः | स प्रासमाविध्य तदाङ्गदाय | स प्रासम् आविध्य तदा अन्गदाय| समुज्ज्वलन्तम् सहसा उत्ससर्ज | स वालि पुत्रोर् असि वज्र कल्पे | बभूव भग्नो न्यपतच् च