5.38.73
मणि वरम् उपगृह्य तम् महाअर्हम् | जनक नृप आत्मजया धृतम् प्रभावात् | गिरि वर पवन अवधूत मुक्तः | सुखित मनाः प्रतिसम्क्रमम् प्रपेदे