3.23.7
प्रभिन्नगजसंकाशतोयशोणितधारिणः | - यद्वा - प्रभिन्न गज संकाश तोय शोणित धारिणः | आकाशम् तत् अनाकाशम् चक्रुः भीम अंबु वाहकाः