6.65.30
अमृतोत्पादने नद्धो भुजङ्गेनेव मन्दरः | स काञ्चनं भारसहं निवातं | विद्युत्प्रभम् दीप्तमिवात्मभासा | आबध्यमानः कवचम् रराज | सन्ध्याभ्रसम्वीत इवाद्रिराजः