6.67.165
निकृत्तबाहुर्विनिकृत्तपादो | विदार्य वक्त्रं वडवामुखाभम् | दुद्राव रामम् सहसाभिगर्जन् | राहुर्यथा चन्द्रमिवान्तरिक्षे