6.36.22विसर्जयाम् आस ततह् स मन्त्रिणो | विधानम् आज्नाप्य पुरस्य पुष्कलम् | जय आज़िषा मन्त्र गणेन पूजितो | विवेज़ सो अन्तह् पुरम् ऋद्धिमन् महत्