6.59.46
ततो महात्मा स धनुर् धनुष्मान् | आदाय रामह् सहरा जगाम | तम् लक्ष्मणह् प्रान्जलिर् अभ्युपेत्य | उवाच वाक्यम् परम अर्थ युक्तम्