5.7.7
नारी प्रवेकैर् इव दीप्यमानम् | तडिद्भिर् अम्भोदवद् अर्च्यमानम् | हंस प्रवेकैर् इव वाह्यमानम् | श्रिया युतम् खे सुकृताम् विमानम्