2.110.36स राघवाणाम् कुल धर्मम् आत्मनः | सनातनम् न अद्य विहातुम् अर्हसि | प्रभूत रत्नाम् अनुशाधि मेदिनीम् | प्रभूत राष्ट्राम् पितृवन् महा यशाः