6.40.20उद्यम्य चान्योन्यमधिक्षिपन्तौ | संचक्रमाते बहु युद्धमार्गे | व्यायामशिक्षाबलसंप्रयुक्तौ | क्लमं न तौ जग्मतुराशु वीरौ