6.59.97
तम् आह सौमित्रिर् अविस्मयानो | गर्जन्तम् उद्वृत्त सित अग्र दम्ष्ट्रम् | राजन् न गर्जन्ति महा प्रभावा | विकत्थसे पापकृताम् वरिष्ठ