4.19.23शक्रतुल्य पराक्रांतम् वृष्ट्वा इव उपरतम् घनम् | नर्दन्तम् नर्दताम् भीमम् शूरम् शूरेण पातितम् | शार्दूलेन आमिषस्य अर्थे मृग राजम् इव आहतम्