6.14.22
परस्य वीर्यम् स्वबलम् च बुद्ध्वा | स्थानम् क्षयम् चैव तथैव वृद्धिम् | तथा स्वपक्षे प्यनुमृश्य बुद्ध्या | वद्त् क्षमम् स्वामिहितम् स मन्त्री