6.59.105स लक्ष्मणो रावण सायक आर्तश् | चचाल चापम् शिथिलम् प्रगृह्य | पुनश् च सम्ज्नाम् प्रतिलभ्य कृच्च्राच् | चिच्चेद चापम् त्रिदश इन्द्र शत्रोह्