6.69.89
तम् प्रासम् आलोक्य तदा विभग्नम् | सुपर्ण कृत्त उरग भोग कल्पम् | तलम् समुद्यम्य स वालि पुत्रस् | स्तुरम्गमस्य अभिजघान मूर्ध्नि