5.37.64समीक्ष्य तम् सम्यति चित्र कार्मुकम् | महाबलम् वासव तुल्य विक्रमम् | सलक्ष्मणम् को विषहेत राघवम् | हुत अशनम् दीप्तम् इव अनिल ईरितम्