6.59.106निकृत्त चापम् त्रिभिर् आजघान | बाणैस् तदा दाशरथिह् शित अग्रैह् | स सायक आर्तो विचचाल राजा | कृच्च्राच् च सम्ज्नाम् पुनर् आससाद