2.63.56
जल आर्द्र गात्रम् तु विलप्य कृच्चान् | मर्म व्रणम् सम्ततम् उच्चसन्तम् | ततः सरय्वाम् तम् अहम् शयानम् | समीक्ष्य भद्रे सुभृशम् विषण्णः