4.28.32मार्ग अनुगः शैल वन अनुसारी संप्रस्थितो मेघ रवम् निशम्य | युद्ध अभिकामः प्रतिनाद शन्की मत्तो गजेन्द्रः प्रतिसंनिवृत्तः