5.47.4ततः तपः सम्ग्रह संचय अर्जितम् | प्रतप्त जाम्बू नद जाल शोभितम् | पताकिनम् रत्न विभूषित ध्वजम् | मनो जव अष्ट अश्व वरैः सुयोजितम्