5.47.6
विराजमानम् प्रतिपूर्ण वस्तुना | सहेम दाम्ना शशि सूर्य वर्वसा | दिवा कर आभम् रथम् आस्थितः ततः | स निर्जगाम अमर तुल्य विक्रमः