2.38.18
इमाम् महा इन्द्र उपम जात गर्भिनीम् | तथा विधातुम् जनमीम् मम अर्हसि | यथा वनस्थे मयि शोक कर्शिता | न जीवितम् न्यस्य यम क्षयम् व्रजेत्