6.65.55
तद्वानरानीकमतिप्रचण्डं | दिशो द्रवद्भिन्नमिवाभ्रजालम् | स कुम्भकर्णः समवेक्ष्य हर्षान् | ननाद भूयो घनवद्घनाभः