6.74.65
स ता महात्मा हनुमान पश्यं | शुकोप कोपाच्च भृशं ननाद | अमृष्यमाणोऽग्निनिकाशचक्षुर् | र्महीधरेन्द्रं तमुवाच वाक्यम्