2.95.19
इति इव रामो बहु सम्गतम् वचः | प्रिया सहायः सरितम् प्रति ब्रुवन् | चचार रम्यम् नयन अन्जन प्रभम् | स चित्र कूटम् रघु वंश वर्धनः