6.59.11तद् राक्षस अनीकम् अतिप्रचण्डम् | आलोक्य रामो भुजग इन्द्र बाहुह् | विभीषणम् शस्त्रभृताम् वरिष्ठम् | उवाच सेना अनुगतह् पृथु श्रीह्