2.67.38
स नः समीक्ष्य द्विज वर्य वृत्तम् | नृपम् विना राज्यम् अरण्य भूतम् | कुमारम् इक्ष्वाकु सुतम् वदान्यम् | त्वम् एव राजानम् इह अभिषिन्चय