2.66.28गतप्रभा द्यौरिव भास्करम् विना | व्यपेतनक्षत्रगणेव शर्वरी | पुरी बभासे रहिता मह आत्मना | न च अस्र कण्ठ आकुल मार्ग चत्वरा