6.59.25
असौ किरीटी चल कुण्डल आस्यो | नाग इन्द्र विन्ध्य उपम भीम कायह् | महा इन्द्र वैवस्वत दर्प हन्ता | रक्षो अधिपह् सूर्य;इव अवभाति