6.59.21यश् च एष जाम्बू नद वज्र जुष्टम् | दीप्तम् सधूमम् परिघम् प्रगृह्य | आयाति रक्षो बल केतु भूतह् | सो असौ निकुम्भो अद्भुत घोर कर्मा