6.67.20
स शूलनिर्भिन्न महाभुजान्तरः | प्रविह्वलः शोणितमुद्वमन्मुखात् | ननाद भीमं हनुमान् महाहवे | युगान्तमेघस्तनितस्वनोपमम्