5.47.5
सुर असुर अधृष्यम् असम्ग चारिणम् | रवि प्रभम् व्योम चरम् समाहितम् | सतूणम् अष्ट असि निबद्ध बन्धुरम् | यथा क्रम आवेशित शक्ति तोमरम्