6.70.67
तस्मिन् हते भ्रातरि रावणस्य | तन् नैरृतानाम् बलम् अर्णव आभम् | त्यक्त आयुधम् केवल जीवित अर्थम् | दुद्राव भिन्न अर्णव सम्निकाशम्