2.21.59
सवै न शक्नोमि पितुः प्रतिज्ञा | मिमामकर्तुम् सकलम् यथावत् | स ह्यवयोस्तत गुरुर्नियोगे | देवाश्च भर्ता स गतिस्स धर्मः