6.73.29सार्कग्रहेन्दु नक्षत्रं वितत्रास नभस्तलम् | स पावकं पावकदीप्ततेजा | हुत्वा महेन्द्रप्रतिमप्रभावः| स चापबाणासिरथाश्वसूतः | खेऽन्तर्दध आत्मानमचिन्त्यरूपः