6.14.13
तीक्षणा न तावत्तव कङ्कपत्रा | दुरापदा राघवविप्रमुक्ताः | भित्त्वाशरीरम् प्रविशन्ति बाणाः | प्रहस्त तेनैव विकत्थसे त्वम्