6.59.41स सायक आर्तो विपरीत चेताह् | कूजन् पृथिव्याम् निपपात वीरह् | तम् प्रेक्ष्य भूमौ पतितम् विसम्ज्मम् | नेदुह् प्रहृष्टा युधि यातु धानाह्