5.36.31
इति इव देवी वचनम् महाअर्थम् | तम् वानर इन्द्रम् मधुर अर्थम् उक्त्वा | श्रोतुम् पुनः तस्य वचो अभिरामम् | राम अर्थ युक्तम् विरराम रामा