5.48.49अथेन्द्रजित्तु द्रुमचीरबद्धम् | विचार्य वीरः कपिसत्तमम् तम् | विमुक्तमस्त्रेण जगाम चिन्ताम् | नान्येन बद्धो ह्यनुवर्ततेऽस्त्रम्