4.20.24किम् अंगदम् स अंगद वीर बाहो विहाय यातो असि अद्य चिरम् प्रवासम् | न युक्तम् एवम् गुण संनिकृष्टम् विहाय पुत्रम् प्रिय पुत्रम् प्रिय चारु वेषम्