5.37.65
सलक्ष्मणम् राघवम् आजि मर्दनम् | दिशा गजम् मत्तम् इव व्यवस्थितम् | सहेत को वानर मुख्य सम्युगे | युग अन्त सूर्य प्रतिमम् शर अर्चिषम्