6.4.118सुर अरि विषयम् घोरम् पाताल विषमम् सदा | सागरम् च अम्बर प्रख्यम् अम्बरम् सागर उपमम् | सागरम् च अम्बरम् च इति निर्विशेषम् अदृश्यत