6.59.37तत् शैल शृन्गम् बहु वृक्ष सानुम् | प्रगृह्य चिक्षेप निशा चराय | तम् आपतन्तम् सहसा समीक्ष्य | बिभेद बाणैस् तपनीय पुन्खैह्