4.24.30तम् सा समासाद्य विशुद्ध सत्त्वम् शोकेन संभ्रांत शरीर भावा | मनस्विनी वाक्यम् उवाच तारा रामम् रण उत्कर्षण लब्ध लक्ष्यम्