6.9.22
त्यजस्व कोपम् सुख धर्म नाशनम् | भजस्व धर्मम् रति कीर्ति वर्धनम् | प्रसीद जीवेम सपुत्र बान्धवाः | प्रदीयताम् दाशरथाय मैथिली