6.59.107
स कृत्त चापह् शर ताडितश् च | स्वेद आर्द्र गात्रो रुधिर अवसिक्तह् | जग्राह शक्तिम् समुदग्र शक्तिह् | स्वयम्भु दत्ताम् युधि देव शत्रुह्