6.47.24
सा बाष्प शोक अभिहता समीक्ष्य | तौ भ्रातरौ देव सम प्रभावौ | वितर्कयन्ती निधनम् तयोह् सा | दुह्ख अन्विता वाक्यम् इदम् जगाद