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सुरम्यम् आसाद्य तु चित्र कूटम् | नदीम् च ताम् माल्यवतीम् सुतीर्थाम् | ननन्द हृष्टः मृग पक्षि जुष्टाम् | जहौ च दुह्खम् पुर विप्रवासात्