5.7.1स वेश्म जालम् बलवान् ददर्श | व्यासक्त वैदूर्य सुवर्ण जालम् | यथा महत् प्रावृषि मेघ जालम् | विद्युत् पिनद्धम् सविहम्ग जालम्